क्लाइंट भेजने का दावा होता है, रिकॉर्ड नहीं
जब रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड और उसकी तय अवधि न हो, तो पहला ही झगड़ा रिश्ता ख़त्म कर देता है।
परिचय से सेटलमेंट तक
रेफ़रल नेटवर्क एक ही वजह से नाकाम होते हैं। पार्टनर का भरोसा उठ जाता है कि उनके भेजे क्लाइंट दर्ज होते हैं और उनका भुगतान ठीक होता है, और अगला क्लाइंट वे चुपचाप कहीं और ले जाते हैं।
जब रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड और उसकी तय अवधि न हो, तो पहला ही झगड़ा रिश्ता ख़त्म कर देता है।
उन्हें दिखता ही नहीं कि उनके भेजे क्लाइंट का क्या हुआ, इसलिए हाल पूछना भी एहसान माँगने जैसा हो जाता है।
पार्टनर यह मिलान ही नहीं कर पाते कि उनका कितना बनता है, और शिकायत आने से बहुत पहले ही यह रिश्ते को खा जाता है।
भेजे गए क्लाइंट तय नियमों और अवधि के साथ दर्ज होते हैं, इसलिए पहला हक़ किसका है यह रिकॉर्ड से तय होता है।
पार्टनर को अपने भेजे क्लाइंट की प्रगति दिखती है, और कुछ नहीं।
किसका कितना बनता है, यह उसी परिचय पर दर्ज रहता है और पार्टनर को दिखता है, इसलिए बिना फ़ोन किए उसे जाँचा जा सकता है।
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