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OSSOT
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टेक्नोलॉजी

ऐसी इंजीनियरिंग कि तीसरे साल भी सही ठहरे।

ऑपरेटिंग लेयर लंबी प्रतिबद्धता है। मायने यह नहीं रखता कि आज कौन-सी टेक्नोलॉजी चलन में है, बल्कि यह कि सिस्टम बदलाव को झेल सके और उसे छूना ख़तरनाक न हो जाए।

  1. 01

    एक्सेस एक मॉडल है, चेकबॉक्स नहीं

    कौन क्या देखेगा, यह ऑपरेटिंग मॉडल से निकलता है — रोल, इकाई और रिश्ता — और इसे इंटरफ़ेस नहीं, सिस्टम लागू करता है। जो परमिशन सिर्फ़ फ़्रंट एंड में है, वह परमिशन है ही नहीं।

  2. 02

    डेटा आपका है

    आपका ऑपरेटिंग डेटा आपके संगठन का है और उसे बिना किसी मोलभाव के, एक दस्तावेज़ीकृत फ़ॉर्मैट में एक्सपोर्ट किया जा सकता है।

  3. 03

    संवेदनशील डेटा को संवेदनशील की तरह ही संभाला जाता है

    पहचान के दस्तावेज़ और कंप्लायंस रिकॉर्ड डेटा की एक अलग श्रेणी माने जाते हैं और उन पर उन्हीं के लायक़ नियंत्रण लगते हैं, उन्हें ऐसे सामान्य फ़ील्ड की तरह नहीं रखा जाता जो संयोग से गोपनीय हों।

  4. 04

    आगे बढ़ाया जा सके, यह डिज़ाइन में ही है

    आप जो सिस्टम पहले से चला रहे हैं, उनसे जुड़ना सामान्य बात मानी जाती है, और आगे की मोबाइल तथा ऑटोमेशन क्षमता आर्किटेक्चर में पहले से सोची गई है, बाद में ठूँसी नहीं जाती — बाद में ठूँसने से ही प्लेटफ़ॉर्म डगमगाने लगते हैं।

  5. 05

    कई भाषाएँ, बुनियाद में

    भाषा डेटा मॉडल का हिस्सा है, बाद में ऊपर चढ़ाई गई परत नहीं, और इसी से कोई ऑपरेशन सचमुच दो भाषाओं में चल पाता है, सिर्फ़ अपना इंटरफ़ेस ट्रांसलेट नहीं करता।

एक निजी बातचीत शुरू करें।

हमें बताइए कि आपका कारोबार आज कैसे चलता है और कहाँ टूट रहा है। हम आपको बता देंगे कि OSSOT सही बैठता है या नहीं।